Cina – सिना
Cina बच्चों के पेट के कीड़ों (Roundworms), चिड़चिड़ेपन, सोते समय दांत किटकिटाने और नाक खुजलाने की बेहतरीन होम्योपैथिक दवा है। जानें इसके लक्षण, उपयोग और कैमोमिला से इसकी तुलना।
Cina (सिना), होम्योपैथी में मुख्य रूप से बच्चों के रोगों, विशेषकर पेट के कीड़ों और उससे उत्पन्न होने वाले जिद्दी व चिड़चिड़े स्वभाव को ठीक करने के लिए जानी जाती है।
विस्तृत विवरण (Detailed Description)
1. पेट में कीड़ों की दवा (Remedy for Worms)
- यह मुख्य तौर पर बच्चों की दवा है। इसे प्रायः कृमि-धातु (Worm diathesis - कीड़े पड़ने की प्रवृत्ति वाले) के बच्चों के लिये प्रयुक्त किया जाता है।
- ये कृमि गोल और गिंडोये जैसे (Round worms - केंचुए जैसे गोल कीड़े) होते हैं।
- डॉ. केंट (Dr. Kent) का कहना है कि यह औषधि चिलूंणों (Thread worms / Pinworms - छोटे-छोटे सफेद कीड़े) के लिए नहीं है। चिलूंणे वे छोटे-छोटे कृमि हैं जो बच्चों के मल-द्वार (Anus) से बाहर आते-जाते रहते हैं, और गुदा-प्रदेश (Anal region) में सुर्खी (लालिमा) और चिरमिराहट (तीव्र खुजली) पैदा करते हैं।
- उनका कहना है कि इसे केवल 'कृमि की औषधि' समझ कर ही दे देना उपयुक्त कारण नहीं है। इस औषधि को देने के मुख्य कारण दो होने चाहियें:
- नाक खुजलाना और अंगों का फड़कना: एक तो बच्चे का नाक की खुजली के कारण नाक में बार-बार अंगुली घुसेड़ते रहना, यहां तक कि कभी-कभी खुजलाते-खुजलाते खून तक निकाल डालना (Boring into the nose); सोते हुए दांत किटकिटाना (Grinding of teeth) या सोते हुए चौंक उठना (Startling in sleep); अंगों का थर-थराना (कांपना) और फुदकना (Twitching and Jerking)।
- चिड़चिड़ापन (Irritability): दूसरा कारण, Chamomilla (कैमोमिला) की तरह चिड़चिड़ा होना। अपने मानसिक स्वभाव के कारण बच्चा नर्स को लात मार देता है, हर समय गोद में रहना चाहता है (Desire to be carried), झूले में झुलाया जाना चाहता है। कभी यह और वह वस्तु चाहता है, परन्तु जब दी जाए तब लेने से इन्कार कर देता है।
- लक्षणों का महत्व: डॉ. नैश (Dr. Nash) लिखते हैं कि वे टाइफॉयड (Typhoid) के एक बच्चे का इलाज कर रहे थे। टाइफॉयड के लिये पुस्तकों में जितनी दवाएं लिखी गई हैं वे सब दी गईं, परन्तु रोगी ठीक नहीं हो रहा था। लक्षण उसके Cina के थे, परन्तु यह औषधि कहीं टाइफॉयड के लिये किसी पुस्तक में निर्दिष्ट (बताई गई) नहीं थी। अंत में 'लक्षणों के आधार पर' उन्होंने सिना की ही कुछ मात्राएं दीं और वह बच्चा ठीक हो गया।
- होम्योपैथी का सिद्धांत: इससे यह बात और पुष्ट हो गई कि होम्योपैथी में चिकित्सक को 'रोग के नाम' से चिकित्सा न करके 'लक्षणों के आधार पर' (Symptomatic treatment) चिकित्सा करनी चाहिये।
- डॉ. नैश का कथन है कि यह औषधि 200 शक्ति (Potency) में अच्छा काम करती है।
2. सिना (Cina) तथा कैमोमिला (Chamomilla) की तुलना
- सिना और कैमोमिला के स्वभाव में बहुत-कुछ समानता पायी जाती है (दोनों के बच्चे बहुत चिड़चिड़े होते हैं), परंतु इन दोनों में स्पष्ट अंतर है:
भूख (Appetite):
- सिना का बच्चा सदा भूख-भूख चिल्लाता है। खाने के बाद फिर भूखा हो जाता है, उसकी भूख कभी संतुष्ट नहीं होती (Canine hunger / Insatiable appetite)। यह बात कैमोमिला में नहीं है।
चेहरे का रंग (Facial appearance):
- सिना के बच्चे की दोनों गालों का रंग कभी गर्म-लाल होगा, मालूम पड़ेगा बड़ा स्वस्थ है; कभी फीका (Pale) और रोगग्रस्त होगा, मालूम पड़ेगा कब का रोगी है। कभी एक-साथ लाल-पीला होगा—गाल लाल परन्तु मुख तथा नाक के आस-पास फीकापन (Pale around mouth and nose)। यह सिना का मूर्त-रूप (जीवित चित्र) है।
- इसके विपरीत, अगर चेहरा एक गाल में लाल-गर्म हो और दूसरी गाल में फीका और ठंडा हो, तो यह कैमोमिला का लक्षण है।
- अन्य भिन्नताएं: इन लक्षणों के साथ नाक का खुजलाना, सोते हुए दांत किटकिटाना और अंगों का थरथराना अलग लक्षण हैं जो कैमोमिला में नहीं हैं।
- पेशाब का रंग (Urine color): सिना के बच्चे के पेशाब को रखा जाए तो कुछ देर के बाद उसका रंग दुधिया (Milky white) हो जाता है। कैमोमिला का पेशाब पीला रहता है।
3. इस औषधि के अन्य लक्षण (Other Symptoms)
i. बिस्तर में पेशाब (Bedwetting / Enuresis):
- कृमि (Worms) की खुजलाहट की वजह से यह बच्चा रात को बिस्तर में पेशाब कर देता है। बिना कृमियों के भी पेशाब कर देने को यह ठीक कर देता है।
ii. अंगों का थरथराना और ऐंठन (Twitchings and convulsions):
- कृमि की वजह से सोते समय इस बच्चे के अंग थरथराते हैं, ऐंठन हो जाती है। सिना द्वारा कृमि मर नहीं जाते, परंतु शरीर का विकास (मेटाबॉलिज्म) इस प्रकार का होने लगता है कि उसमें कृमि पनप नहीं पाते। (कुछ कृमियों के नाश से और कृमि पैदा हो सकते हैं, परन्तु शरीर का 'धातु-क्रम' - Constitution बदल देने से कृमियों का उत्पन्न होना रुक जाता है)।
iii. गिंडोये-जैसे कृमि (Roundworms) और अन्य कीड़ों का इलाज:
- बच्चों के पेट में तीन प्रकार के कृमि होते हैं: चिलूंणे (Thread worms), गिंडोये जैसे गोल-गोल कृमि (Round worms) और टेप जैसे लम्बे कृमि (Tape worms)।
- इनमें से गिंडोये जैसे (गोल) कृमियों के लिये Cina काम करता है, अन्य कृमियों के लिये नहीं।
- चिलूंणे (Thread worms): ये वे छोटे-छोटे कृमि हैं जो मल-द्वार (Anus) से बाहर आते-जाते रहते हैं, और बच्चे के गुदा प्रदेश में खुजलाहट पैदा करते हैं। इसका इलाज यह है कि बच्चे के गुदा-प्रदेश में वैसलीन (Vaseline) अथवा ओलिव ऑयल (Olive oil - जैतून का तेल) लगा दिया जाए। ये चिलूंणे कुछ खाने के लिए और अपने वंश की वृद्धि के लिए बाहर आते हैं। वैसलीन के कारण वे अपना काम नहीं कर पाते और धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं।
- टेप-कृमि (Tape worms): ये बहुत ही लम्बे होते हैं। ये प्रायः मांसाहारियों (Non-vegetarians) के पेट में पाये जाते हैं। इनको नष्ट करने का दूसरा ही उपाय है। इन कृमियों को बड़े कद्दू का बीज (Pumpkin seeds) खाने का बड़ा शौक होता है। बच्चे को भूखा रख कर घंटे-घंटे बाद बड़े कद्दू की छिलके रहित गिरी तीन-चार बार खिला दी जाती है। ये टेप-वर्म उसी गिरी को बड़े शौक से खाते हैं और बेहोश हो जाते हैं। या तो ये स्वयं निकल जाते हैं या कैस्टर ऑयल (Castor oil - अरंडी का तेल) देने से ये निकल जाते हैं। जब ये निकल रहे हों तब एक बात का ध्यान रखना चाहिये: कृमि जब निकले तब उसे सारे-का-सारा निकलने देना चाहिये, नहीं तो वह बीच में टूट जाता है, और बचा हुआ हिस्सा बढ़ कर फिर पूरा कृमि बन जाता है।
- चेलोन (Chelone): चिलूंणे और गोल-कृमि (Thread-worms and round-worms) के लिये Chelone Glabra उत्तम औषधि है। इस औषधि के मूल-अर्क (Mother Tincture / Q) की 4-5 बूंदें देने से ये दोनों प्रकार के कृमि नष्ट हो जाते हैं। कई चिकित्सक बच्चों के पेट के कृमियों के लिये इसी औषधि का प्रयोग करते हैं और उनका कहना है कि इससे उन्हें बहुत सफलता मिलती है।
4. शक्ति (Potency)
- इस औषधि का प्रयोग मुख्यतः 30, 200 शक्ति में किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: सिना (Cina) बच्चे के स्वभाव को कैसे बदलती है?
उत्तर: जब बच्चा पेट के कीड़ों के कारण बहुत चिड़चिड़ा हो जाए, हर समय रोए, चीजें मांगे और मिलने पर फेंक दे, तो यह दवा न सिर्फ कीड़ों के अनुकूल वातावरण को खत्म करती है, बल्कि बच्चे के जिद्दी और गुस्सैल स्वभाव को भी शांत करती है।
प्रश्न 2: सिना के रोगी बच्चे की भूख कैसी होती है?
उत्तर: सिना के रोगी को 'कुत्ते जैसी भूख' (Canine hunger) लगती है। वह हमेशा खाना मांगता है, और खाना खाने के तुरंत बाद फिर से भूखा महसूस करता है।
प्रश्न 3: क्या सिना का इस्तेमाल बिस्तर गीला करने (Bedwetting) की आदत छुड़ाने के लिए किया जा सकता है?
उत्तर: जी हाँ। यदि बच्चा पेट के कीड़ों की वजह से या बिना कीड़ों के भी रात को सोते समय बिस्तर गीला कर देता है, तो लक्षणों के आधार पर सिना बहुत फायदेमंद साबित होती है।
प्रश्न 4: क्या सिना (Cina) का उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, इसका उपयोग हमेशा एक योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की उचित सलाह और देखरेख में ही किया जाना चाहिए। बिना चिकित्सकीय परामर्श के इसका सेवन हानिकारक हो सकता है।
यह सामग्री सिर्फ शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और से पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।