Drosera Rotundifolia (Sundew) – ड्रौसरा रोटण्डिफ़ोलिया

संशोधित: 21 August 2026 ThinkHomeo

Drosera (ड्रौसरा) होम्योपैथिक दवा के उपयोग, लक्षण और फायदे। कुत्ता-खांसी (Whooping cough), हड्डियों की टीबी (Bone Tuberculosis), और वक्ताओं/गायकों के स्वरभंग (Hoarseness) की अचूक दवा। जानें इसके बारे में सबकुछ।

Drosera Rotundifolia (Sundew) – ड्रौसरा रोटण्डिफ़ोलिया

Drosera (ड्रौसरा) होम्योपैथी में मुख्य रूप से श्वसन तंत्र (Respiratory System), कुत्ता-खांसी (Whooping Cough) और हड्डियों के रोगों पर बहुत ही गहरा प्रभाव डालने वाली औषधि है।

व्यापक-लक्षण तथा मुख्य-रोग (Generals and Particulars)

1. कुत्ता-खांसी (Whooping cough)

  • डॉ० हनीमैन (Dr. Hahnemann) का कथन था कि कुत्ता-खांसी की यह मुख्य दवा है।
  • खांसी का स्वरूप: रोगी भौं-भौं (Barking sound / कुत्ते के भौंकने जैसी आवाज) करके खांसता है, जिसमें तारदार श्लेष्मा (Stringy mucus / रेशेदार या चिपचिपा कफ) निकलता है।
  • मात्रा (Dose) संबंधी सावधानी: हनीमैन का कथन था कि कुत्ता-खांसी में 30 शक्ति (30 Potency) की एक मात्रा (Single dose) देने से सात-आठ दिन में रोग चला जाता है। उनका यह भी कहना था कि इस औषधि की दूसरी मात्रा (Second dose) 'नहीं' देनी चाहिये, क्योंकि इतना ही नहीं कि दूसरी मात्रा पहली मात्रा के असर को दूर कर देती है, अपितु (Rather / बल्कि) रोगी को हानि भी पहुंचती है।
  • खांसी बढ़ने का समय: इस खांसी का विशेष प्रभाव श्वास-नलिका के ऊपरी भाग (Larynx / स्वरयंत्र) पर होता है, वहीं सरसराहट (Tickling ) होती है। ज्यों ही रोगी सोने के लिये बिस्तर पर सिर रखता है कि खांसी शुरू हो जाती है। ठंडी वस्तुओं के खाने-पीने से यह खांसी बढ़ जाती है (Aggravation)।

2. व्याख्याताओं का स्वरभंग (Sore-throat / Hoarseness)

  • उपदेशकों (Preachers), व्याख्याताओं (Lecturers / भाषण देने वालों), और गायकों (Singers) का गला बोलते-बोलते दुखने लगता है। गले में खराश (Irritation) होने लगती है, गला बैठ जाता है, आवाज फट जाती है (Cracked voice), और बोलने में बहुत जोर लगाना पड़ता है। ऐसी हालत में यह औषधि अत्यंत लाभप्रद (Beneficial ) है।

3. क्षय रोग (टी०बी० / Tuberculosis)

  • डॉ० टायलर (Dr. Tyler) का कथन है कि इस बात को तो सब जानते हैं कि इस औषधि का कुत्ता-खांसी में प्रयोग किया जाता है, परन्तु क्षय-रोग (Tuberculosis) के लिये भी यह अत्युत्तम (Excellent / बहुत अच्छी) औषधि है।
  • हड्डियों की टीबी: इसकी तरफ चिकित्सकों  का ध्यान कम गया है। श्वास-नलिका की खुरखुराने वाली खांसी (Scraping cough) क्षय-रोग की सबसे बड़ी परेशानी होती है। डॉ० टायलर का कथन है कि जब उन्होंने अनुभव से देखा कि हड्डी (Bone), जोड़ (Joints) और ग्लैंड (Glands ) के क्षय-रोग की चिकित्सा (Treatment) में यह औषधि कितनी सफल है, तब उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा।
  • डॉ० हनीमैन का सन्दर्भ: इस उद्देश्य से जब उन्होंने हनीमैन के 'मैटीरिया-मैडिका-प्यूरा' (Materia Medica Pura) को पढ़ा, तब उनकी आंखें खुल गईं, क्योंकि उसमें उन्होंने इस औषधि के विषय में लिखते हुए जोड़ों, कन्धे की हड्डी (Collar bone / Shoulder bone), गिट्टे की हड्डी (Ankle bone / टखने की हड्डी) तथा अन्य अस्थियों (Bones) पर इसके प्रभाव को मोटे अक्षरों (Bold letters) में लिखा है।
  • आनुवांशिक टीबी: जिन रोगियों के जीवन इतिहास (Life history) में वंशानुगत (Hereditary / पैतृक) क्षय-रोग के लक्षण मौजूद हों, उन्हें ड्रौसरा रोग-मुक्त (Cure) कर देता है।
  • इसके अतिरिक्त क्षय-रोग के अन्य लक्षण—पुराना लगातार रहने वाला नजला (Chronic catarrh / पुराना जुकाम), गले में लगातार खराश का बने रहना, फेफड़ों (Lungs) तथा श्वास नलिका का कफ से भरे रहना—ये जहां मौजूद हों, वहां यह औषधि विशेष प्रभाव दिखलाती है।

4. दीर्घ-कालीन निद्रा-नाश तथा पसीना (Chronic Insomnia & Sweating)

  • दीर्घ-कालीन निद्रा-नाश (Chronic Insomnia / लंबे समय से नींद न आना) तथा नींद से जागने के बाद भारी पसीना (Profuse sweating after waking) आना—ये दोनों भी इस औषधि के क्षय-रोग (टीबी) या अन्य किसी रोग में पाये जाने वाले विशिष्ट लक्षण हैं।

5. शक्ति (Potency)

  • इस औषधि का प्रयोग मुख्य रूप से 30 और 200 शक्ति में किया जाता है।

(विशेष नोट: कुत्ता-खांसी में मात्रा दोहरानी नहीं चाहिये / Dose should not be repeated in whooping cough)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: Drosera (ड्रौसरा) का सबसे प्रमुख उपयोग किस बीमारी में होता है? 

उत्तर: इसका सबसे प्रमुख उपयोग 'कुत्ता-खांसी' (Whooping Cough) में होता है। जब मरीज कुत्ते के भौंकने जैसी (भौं-भौं) आवाज के साथ खांसता है और लेटते ही खांसी बढ़ जाती है, तब यह दवा अचूक काम करती है।

प्रश्न 2: Drosera की डोज को लेकर होम्योपैथी के जनक डॉ. हनीमैन ने क्या चेतावनी दी है? 

उत्तर: डॉ. हनीमैन के अनुसार, कुत्ता-खांसी में Drosera 30 की केवल एक ही खुराक (Single Dose) देनी चाहिए। इसे दोहराना (Repeat करना) नहीं चाहिए, क्योंकि दूसरी खुराक पहली खुराक के असर को खत्म कर देती है और रोगी को नुकसान पहुँचा सकती है।

प्रश्न 3: क्या यह टीबी (Tuberculosis) के मरीजों के लिए भी उपयोगी है? 

उत्तर: जी हाँ, फेफड़ों की टीबी के साथ-साथ यह 'हड्डियों, जोड़ों और ग्रंथियों की टीबी' (Bone and Joint TB) में भी बहुत ही असरदार है, खासकर तब जब टीबी की बीमारी आनुवांशिक (पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली) हो।

प्रश्न 4: गायकों और वक्ताओं (Speakers) के लिए ड्रौसरा कैसे फायदेमंद है? 

उत्तर: जो लोग बहुत ज्यादा बोलते या गाते हैं (जैसे गायक, टीचर, नेता), लगातार बोलने से उनका गला बैठ जाता है, आवाज फट जाती है और गले में खराश हो जाती है। ऐसी स्थिति (Hoarseness of voice) को ठीक करने के लिए ड्रौसरा एक बेहतरीन दवा है।


यह सामग्री सिर्फ शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और से पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

इस लेख को साझा करें

संबंधित लेख

0 संबंधित लेख