Carbo Animalis – कार्बो एनीमैलिस (जान्तव कोयला)
उन रोगियों के लिए है जिनकी गिल्टियां (Glands) पकने के बजाय सख्त (Hard) हो जाती हैं। यह कैंसर, प्लेग और अत्यधिक कमजोरी की अचूक दवा है।
Carbo Animalis, जिसे 'जान्तव कोयला' (Animal Charcoal) भी कहा जाता है, होम्योपैथी में एक गहन क्रिया करने वाली (Deep acting) औषधि है। यह विशेष रूप से उन रोगों में काम आती है जो शरीर में धीरे-धीरे घर करते हैं और घातक रूप ले लेते हैं।
व्यापक-लक्षणों की सूची (List of Generals and Particulars)
- ग्रन्थियों का कड़ापन (Induration of Glands) - प्लेग, कैंसर, ट्यूमर आदि।
- ग्रन्थि-शोथ (Glandular Inflammation) में Carbo Animalis तथा Belladonna की तुलना।
- मासिक-धर्म (Menstruation) तथा प्रदर (Leucorrhoea) में मरने के समान कमजोरी।
- जरा-सा बोझ उठाने से पैर में मोच (Sprain) आ जाना।
- त्वचा पर तांबे-से रंग की (Copper-coloured) फुन्सियां।
- शक्ति (Potency) और प्रकृति (Nature)।
1. ग्रन्थियों का कड़ापन - प्लेग, कैंसर, ट्यूमर आदि
- यह एक गहन क्रिया करने वाली औषधि है। इसकी शिकायतें रोग को लेकर चुपके-चुपके आती हैं, धीरे-धीरे बढ़ती हैं, और जब प्रकट में आती हैं तब घातक (Malignant) रूप धारण कर लेती हैं। शरीर की ग्रन्थियों (Glands) पर इसका विशेष प्रभाव है।
ऐतिहासिक संदर्भ (Historical Context):
- डॉ. यूनान (Dr. Unan) लिखते हैं कि जिन दिनों लंदन में प्लेग (Plague) का प्रचंड प्रकोप हुआ और प्रत्येक घर में मृत्यु ने अपना अड्डा जमा लिया, तब मोचियों (Cobblers) के घरों में प्लेग ने आक्रमण नहीं किया। इसका कारण यह था कि मोची लोग अपने घरों के सामने चमड़ा जलाया करते थे। Carbo Animalis जानवर के चमड़े के कोयले को ही कहते हैं। क्योंकि वे जानवर का चमड़ा जलाते थे, इसलिए उसके धुएं का उन पर होम्योपैथिक प्रभाव रहता था और वे प्लेग के आक्रमण के शिकार नहीं हुए।
प्रभाव:
- Carbo Animalis का मुख्य प्रभाव ग्रन्थियों को कड़ा (Indurated) कर देना है और इसलिए शरीर में जिन अंगों में भी ग्रन्थियों में कड़ापन पाया जाए, यह उसे दूर करता है।
- बगल (Axilla), जांघ (Groin), सीने (Chest) आदि में गिल्टियों के सूज जाने और उनके कड़ा पड़ जाने में यह औषधि उपयोगी है।
- सुजाक (Gonorrhea) और आतशक (Syphilis) की गिल्टियां (Buboes) जब लम्बवत कड़ी पड़ जाती हैं, तब भी इस औषधि से लाभ होता है।
- जब कोई गिल्टी चीरी जाती है (Lanced) और उसके चारों तरफ कड़ापन आ जाता है, तब भी इसका उपयोग किया जाता है।
कैंसर और ट्यूमर:
- कैंसर और ट्यूमर में भी क्योंकि गिल्टियों का कड़ापन होता है इसलिये उन्हें भी यह ठीक करता है।
- स्त्रियों के स्तन के कैंसर (Breast Cancer) में स्तन की गिल्टियां सूज जाती हैं। गर्भाशय के कैंसर (Uterine Cancer) में गर्भाशय का मुख (Cervix) अत्यन्त कड़ा पड़ जाता है, दर्द होता है, और खून भी जाता है। इन सब गिल्टियों के कड़ेपन में Carbo Animalis को स्मरण करना चाहिए।
केस स्टडी:
- 1841 में डॉ. हार्टंग (Dr. Hartung) ने आस्ट्रिया के फ़ील्ड मार्शल कौंट रैडेटस्की के आंख के ट्यूमर को Carbo Animalis 30 के प्रयोग से ठीक कर दिया था, जबकि उनके आंख के ट्यूमर को डॉक्टरों ने असाध्य (Incurable) घोषित कर दिया था।
2. ग्रन्थि-शोथ में Carbo Animalis तथा Belladonna की तुलना
- Carbo Animalis की ग्रन्थि कड़ी पड़ जाती है, पकती नहीं। इस क्षेत्र में इसकी Belladonna से तुलना की जाती है:
- इसमें भी सब ग्रन्थियां सूज जाती हैं, छूने से गर्म लगती हैं, स्पर्श नहीं किया जा सकता। पहले चमकदार लाली दिखाई देती है, फिर नीला-सा रंग आ जाता है और अगर इलाज न किया जाए तो ज़ख्म फूट जाता है, पस (Pus) पड़ जाती है।
Carbo Animalis:
- इसमें ऐसा नहीं होता। ग्रन्थि का शोथ (Inflammation) धीरे-धीरे होता है, उसकी चाल भी धीमी होती है और वह पकने के स्थान पर कड़ेपन (Induration) पर आकर रुक जाती है। अगर पके तो पस निकल जाने और सूख जाने पर ठीक हो जाए, परन्तु यह ठीक नहीं होती, पकने की जगह कड़ी पड़ जाती है।
- उदाहरण: स्त्रियों में भग (Vulva) सूज कर कड़ा पड़ जाता है। अन्य प्रकार के ज़ख्म भी ठीक होने के स्थान पर कड़े पड़ जाते हैं। इस औषधि की विशेषता ही यह है कि रोग का आक्रमण ग्रन्थियों पर होता है और ग्रन्थियां पकने के बजाय कड़ी पड़ जाती हैं, और कड़ेपन पर आकर वहीं रुक जाती हैं।
3. मासिक-धर्म (Menstruation) तथा प्रदर (Leucorrhoea) में मरने के समान कमजोरी
- स्त्रियों को मासिक-धर्म बहुत जल्दी होता है, बहुत देर तक रहता है, और बहुत ज़्यादा खून जाता है।
- इस औषधि की रोगिणी प्रत्येक मासिक-धर्म के समय इतनी कमजोर हो जाती है कि 'मरने के समान' (Deathly weakness) हो जाती है।
- जितना रुधिर जाता है उससे कमज़ोर हो जाना तो स्वाभाविक है, परन्तु खून जाने की तुलना में कमज़ोरी आशातीत (Disproportionate) हो जाती है।
- प्रदर (Leucorrhoea) में भी आशातीत कमज़ोरी हो जाती है।
4. जरा-सा बोझ उठाने से पैर में मोच आ जाना
- थोड़ा-सा भी बोझ उठाने में मोच (Strain/Sprain) पड़ जाती है, बहुत कमजोरी अनुभव होती है और पैर के गिट्टे (Ankles) चलते हुए मुड़ जाते हैं।
- जोड़ (Joints) कमज़ोर होते हैं। रीढ़ के अन्त वाली हड्डी (Coccyx) पर जोर पड़ने से उसमें दर्द होता है।
5. त्वचा पर तांबे-से रंग की फुन्सियां
- चेहरे और शरीर पर तांबे के रंग की-सी (Copper-coloured) बेशुमार फुन्सियां (Eruptions) हो जाती हैं जिन्हें यह दूर कर देता है। (यह लक्षण अक्सर सिफलिस मियाज्म (syphilis miasm) की ओर इशारा करता है)।
6. शक्ति तथा प्रकृति (Potency and Nature)
- शक्ति: 3 विचूर्ण (Trituration), 6, 30, 200।
- प्रकृति: औषधि 'सर्द' (Chilly) प्रकृति के लिए है।
प्रकृति (Modalities) - लक्षण कम या ज्यादा होना
लक्षणों में वृद्धि (Worse):
- ठंडी हवा से रोग का बढ़ना (Aggravation from cold air)।
- हजामत (Shaving) के बाद परेशानी।
- रजो-धर्म (Menses) के बाद परेशानी।
लक्षणों में कमी (Better):
- गर्म कमरे में अच्छा लगना (Relief in warm room)।
- हाथ से दबाने पर आराम (Relief from pressure)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या Carbo Animalis और Carbo Veg एक ही हैं?
उत्तर: नहीं, दोनों अलग हैं। Carbo Veg 'वनस्पति कोयला' (Vegetable Charcoal) है जो गैस और अपच के लिए प्रसिद्ध है, जबकि Carbo Animalis 'जान्तव कोयला' (Animal Charcoal) है जो गिल्टियों के कड़ेपन और कैंसर जैसी स्थितियों के लिए है।
प्रश्न 2: क्या यह दवा कैंसर को ठीक कर सकती है?
उत्तर: होम्योपैथी में लक्षणों के आधार पर इलाज होता है। Carbo Animalis कैंसर के दर्द, जलन और गिल्टियों के कड़ेपन को कम करने में बहुत सहायक है, और कई मामलों में (जैसा कि लेख में उल्लेखित है) ट्यूमर को ठीक भी कर सकती है। लेकिन कैंसर का इलाज हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख में होना चाहिए।
प्रश्न 3: इस दवा का सबसे मुख्य लक्षण क्या है?
उत्तर: "गिल्टियों का पत्थर जैसा कड़ा हो जाना" (Stony hardness of glands) और "मासिक धर्म के बाद अत्यधिक कमजोरी" (Exhaustion after menses) इसके सबसे प्रमुख लक्षण हैं।