Eupatorium Perfoliatum – यूपेटोरियम परफ़ोलियेटम
Eupatorium Perfoliatum (यूपेटोरियम) होम्योपैथी में 'हड़तोड़ बुखार' (Bone-break fever), इन्फ्लुएंजा, और गठिया की अचूक दवा है। साथ ही जानें मलेरिया, टाइफाइड और साधारण ज्वर की प्रमुख होम्योपैथिक औषधियों की सूची।
Eupatorium Perfoliatum (यूपेटोरियम) होम्योपैथी में 'हड़तोड़ बुखार' (Bone-break fever), इन्फ्लुएंजा, और गठिया की अचूक दवा है।
व्यापक-लक्षण तथा मुख्य-रोग (General and Particulars)
- सारे शरीर में हड़तोड़ दर्द
- इन्फ्लुएजा में हड्डियों में दर्द
- ज्वर में समय (7 से 9 के भीतर प्रातः काल ज्वर आना)
- ज्वर में शीतावस्था से पहले प्यास
- ज्वर में शीत का प्रारंभ पीठ से होना
- ज्वर उतर जाने पर औषधि देनी चाहिये
- यूपेटोरियम से लाभ न हो ठो नैट्रम म्यूर या सीपिया दो
- ज्वर में यूपेटोरियम तथा नक्स वोमिका की तुलन
- औषधि वात-प्रकृति (Gouty nature) के लिये है
- गठिया कोई रोग नहीं है, शरीर की एक प्रकृति है
विस्तृत विवरण-
1. सारे शरीर में हड़तोड़ दर्द (Bone-breaking pain)
- इस औषधि का नाम 'बोन-सेट' (Bone-set) भी है क्योंकि मलेरिया (Malaria), डेंगू बुखार (Dengue fever) और इन्फ्लुएंजा (Influenza / फ्लू) जैसे ज्वरों में जब प्रत्येक अंग तथा मांसपेशी (Muscle) दर्द करने लगती है और हर हड्डी और हर जोड़ (Joint), खासकर हाथ की कलाई, ऐसा दर्द करने लगती है मानो हड्डियां चूर-चूर हो गई हों, तब हड्डियों में बैठ रहे इस दर्द को यह दवा दूर कर देती है। यह हड्डियों को आराम दे देती है, इसीलिये इसे 'बोन-सेट' कहते हैं।
- जिस ज्वर में हड्डियां दर्द करने लगें, उस ज्वर में यह औषधि रामबाण का काम करती है।
2. इन्फ्लुएंजा में हड्डियों में दर्द (Bone pain in Influenza)
- इन्फ्लुएंजा में जब रोगी अनुभव करे कि हड्डियां दर्द के मारे टूटी जा रही हैं, छींकें आयें (Sneezing), जुकाम हो (Coryza), सिर में ऐसा दर्द हो मानो सिर फटा जा रहा है, हरकत (Motion) से तकलीफ बढ़े, ठंड से रोगी परेशान हो और शरीर को ढकना चाहे—इन लक्षणों में Eupatorium (यूपेटोरियम) और Bryonia (ब्रायोनिया) में से किसी दवा का चुनाव करना पड़ता है।
यूपेटोरियम तथा ब्रायोनिया में भेद (Difference):
- दोनों औषधियां एक-सी हैं, परन्तु यूपेटोरियम में हड्डियों का दर्द विशेष रूप से पाया जाता है। इस औषधि का 'हड्डियों में दर्द' इतना विशेष लक्षण (Keynote symptom) है कि अगर यह लक्षण न हो, तो इस औषधि को देना गलत होगा।
- ब्रायोनिया में हड्डियों का दर्द तो होता है, परन्तु उसका यह मुख्य लक्षण नहीं है। इसके अतिरिक्त ब्रायोनिया में खूब पसीना (Sweat) आता है, यूपेटोरियम में या तो पसीना आता ही नहीं, या बहुत थोड़ा आता है।
- तीसरा भेद यह है कि ब्रायोनिया में रोगी बेचैन नहीं होता, आराम से पड़े रहना चाहता है, हरकत पसन्द नहीं करता; जबकि यूपेटोरियम में आराम पसन्द होने पर भी वह बेचैन (Restless) होता है।
यूपेटोरियम तथा रस टॉक्स में भेद (Eupatorium vs Rhus Tox):
- दोनों औषधियों में शरीर के अंगों में दर्द होता है, परन्तु Rhus Tox में रोगी हरकत करना पसन्द करता है, आराम से नहीं पड़े रह सकता, करवटें बदलता रहता है।
- यूपेटोरियम में आराम से पड़े रहने में रोगी परेशान नहीं होता, उसे ब्रायोनिया की तरह आराम पसन्द है। हड्डियों में 'हड़तोड़-दर्द' और 'पसीना न आना' यूपेटोरियम के विशिष्ट लक्षण हैं।
3. ज्वर में समय (Fever periodicity: 7 to 9 AM)
- इसके ज्वर के समय की विशेषता यह है कि ज्वर अक्सर सुबह 7 से 9 बजे के भीतर आ जाता है या एक दिन सवेरे 9 बजे और दूसरे दिन दोपहर 12 बजे।
4. ज्वर में शीतावस्था से पहले प्यास (Thirst before chill)
- ज्वर में पहली अवस्था शीत (जाड़े / Chill) की अवस्था होती है। यूपेटोरियम के ज्वर में शीत अवस्था आने से काफी पहले बेहद प्यास (Intense thirst) लगनी शुरू हो जाती है, साथ ही हड्डियों में दर्द होना शुरू हो जाता है। इस प्यास और हड्डियों के दर्द को देखकर रोगी समझ जाता है कि ज्वर आने वाला है।
- Capsicum, China और Natrum Mur में भी शीत-अवस्था आने से पहले प्यास लगनी शुरू हो जाती है, परन्तु इनमें हड्डियों का दर्द नहीं होता।
- Natrum Mur का 'सविराम-ज्वर' (Intermittent fever / मलेरिया) 10 या 11 बजे आता है;
- China का ज्वर हर आक्रमण से अगला आक्रमणें 2-3 घंटे पहले होता है (Anticipatory), हर 7वें या 14वें दिन होता है, रात को कभी नहीं होता;
- Capsicum का ज्वर शाम 5 से 6 बजे के अन्दर होता है;
- Eupatorium का ज्वर प्रातः 7 से 9 बजे आता हैया एक दिन सवेरे 9 बजे और दूसरे दिन दोपहर 12 बजे।
- ज्वर में शीतावस्था से पहले प्यास के लक्षण समान होने पर इन तीनों के समय के लक्षणों पर ध्यान देना होगा।
5. ज्वर में शीत का प्रारंभ पीठ से होना (Chill begins in back)
- इस औषधि के ज्वर में शीत-अवस्था का प्रारंभ पीठ (Back) से होता है, और पीठ से शीत ऊपर मेरु-दंड (Spine / रीढ़ की हड्डी) में चढ़ता अनुभव होता है।
6. ज्वर उतर जाने पर औषधि देनी चाहिये ताकि अगला आक्रमण न हो (Administer after fever subsides)
- ज्वर में औषधि देने का उचित समय वह है जब ज्वर उतर गया हो। इस समय ज्वर-निवारण के लिये जीवनी-शक्ति (Vital force) की प्रतिक्रिया (Reaction) प्रारंभ हो रही होती है। उस समय अगर औषधि दे दी जाय तो जीवनी शक्ति को रोग का मुकाबला करने के लिये बल मिल जाता है।
- प्रायः देखा जाता है कि रोग के अपने शिखर (Peak) पर होने के समय अगर दवा दे दी जाय, तो रोग बढ़ जाता है; अगर ज्वर के वेग के निकल जाने तक प्रतीक्षा कर ली जाय, तो औषधि का पूरा लाभ मिल जाता है। इस समय औषधि देने का परिणाम यह होता है कि अगला आक्रमण (Attack) या तो रुक ही जाता है, या हल्का होता है।
(नोट: यदि आक्रमण जल्दी आ जाय, तो समझना चाहिये कि दवा काम कर रही है और अब आगे बुखार नहीं आएगा। इससे घबराना नहीं चाहिए, बस प्रतीक्षा करनी चाहिए)।
- प्रायः देखा जाता है कि 'सविराम-ज्वर'-मलेरिया-में जब आक्रमण के बाद दवा दी जाय, तो अगला आक्रमण 24 घंटे के बीच ही आ जाता है। इससे चिकित्सक को घबराना नहीं चाहिये, इन्तजार करनी चाहिये, और इन्तजार करने के बाद यह स्पष्ट हो जायगा कि दवा ने ज्वर के चक्र को तोड़ दिया है।
7. यूपेटोरियम से लाभ न हो तो नैट्रम म्यूर या सीपिया दें (Complementary medicines)
- अगर यूपेटोरियम देने के बाद भी मलेरिया या सविराम-ज्वर का जड़ से उन्मूलन न हो (Not fully cured), तो समझना होगा कि रोग की जड़ गहरी है। ऐसी हालत में Natrum Mur या Sepia रोग के बचे-खुचे अंश को दूर कर देंगे क्योंकि ये दोनों यूपेटोरियम के बहुत ही निकट की औषधियां हैं।
8. ज्वर में यूपेटोरियम तथा नक्स वोमिका की तुलना (Eupatorium vs Nux Vomica)
- इन दोनों की ज्वर में बहुत समानता है। दोनों ठंडी हवा को सहन नहीं कर सकते, दोनों में हड्डियों में ऐसा दर्द होता है मानो टूट जायेंगी, दोनों गर्म कमरा पसन्द करते हैं, कपड़ा ओढ़ने से दोनों सुख मानते हैं, कपड़े का छोर हट जाने से दोनों ठंडक महसूस करते हैं।
भेद (Difference):
- यूपेटोरियम का रोगी उदास (Sad), दुखी होता है, मरने की बात करता है। Nux Vomica का रोगी स्वभाव से चिड़चिड़ा (Irritable) होता है, उदासी के स्थान में चिड़चिड़ापन उसका स्वाभाविक लक्षण होता है।
9. औषधि वात-प्रकृति या गठिये के लिये है (Gouty nature)
- यह औषधि स्वभाव से वात-प्रकृति (Gouty/Rheumatic diathesis) की है। गठिये के लिये यह बड़ी उपयुक्त दवा है। अंगुली या कोहनी के जोड़ों में गांठें (Nodosities) पड़ जाती हैं, अंगूठे की गांठों में सूजन हो जाती है। गठिया-ग्रस्त ये वात-प्रकृति के रोगी गांठों में सर्दी खा जाते हैं, हड्डियां दर्द करने लगती हैं, रोगी कहता है कि उसे ठंड सताती है—वह 'शीत-प्रधान' (Chilly) होता है।
गठिया-प्रकृति के कारण सिर-दर्द:
- गठिया प्रकृति के रोगियों को सिर की गुद्दी (Occiput) में भयंकर दर्द हुआ करता है। इनके जोड़ों में दर्द होता है। इसके सिर-दर्द को 'आरथ्रिटिक हेडेक' (Arthritic headache) कहते हैं (यानी गठिये के दर्द वाला सिर-दर्द)।
जोड़ों के दर्द और सिर-दर्द का पर्याय-क्रम से होना (Alternating symptoms):
- यह दर्द ऐसा रूप भी धारण कर लेता है कि जब जोड़ों में दर्द होता है तब सिर दर्द नहीं रहता, जब सिर-दर्द होता है तब जोड़ों का दर्द नहीं रहता। या सिर दर्द जितना बढ़ता है जोड़ों का दर्द उतना ही घटता है।
तीसरे या सातवें दिन मिचली या उल्टी के साथ सिर दर्द:
- यह सिर-दर्द ऐसा रूप भी धारण कर लेता है कि हर तीसरे या सातवें दिन उठता है, सिर-दर्द के साथ मिचली (Nausea) आती है, पित्त की उल्टी (Bilious vomiting) भी आ जाती है, भोजन की गंध से जी मिचलाने लगता है। इन लक्षणों के साथ गठिया-प्रकृति होनी चाहिये।
10. गठिया कोई रोग नहीं है, शरीर की एक प्रकृति है (Gout is a diathesis)
- डॉ. कैन्ट (Dr. Kent) का कहना है कि वे गठिये को 'रोग विशेष' नहीं मानते। कई व्यक्तियों के शरीर की प्रकृति (Constitution/Diathesis) गठिये की होती है, उस प्रकृति का अन्त में परिणाम गठिया हो जाता है। जोड़ों के कड़े हो जाने की प्रकृति, पेशाब में गठिया रोग पैदा करने वाले तत्वों (यूरिक एसिड) का आधिक्य—ये गठिया-प्रकृति के लक्षण हैं। इन लक्षणों को दूर कर दिया जाय, तो गठिया अपने-आप नहीं होता। इन लक्षणों के लिये यूपेटोरियम उत्तम औषधि है।
11. शक्ति तथा प्रकृति (Potency and Nature)
- शक्ति: 30, 200।
- प्रकृति: औषधि 'सर्द' (Chilly) प्रकृति के लिये है।
भिन्न-भिन्न ज्वरों की मुख्य-मुख्य औषधियां (Principal Remedies for Different Fevers)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: Eupatorium Perfoliatum (यूपेटोरियम) का सबसे मुख्य लक्षण क्या है?
उत्तर: इसका सबसे मुख्य लक्षण शरीर की हड्डियों में 'हड़तोड़ दर्द' (Bone-breaking pain) का होना है। मलेरिया, डेंगू या फ्लू में जब ऐसा लगे कि हड्डियां चूर-चूर हो रही हैं, तो यह दवा अचूक काम करती है।
प्रश्न 2: इन्फ्लुएंजा में Eupatorium और Bryonia में क्या फर्क है?
उत्तर: दोनों में शरीर दर्द होता है, लेकिन Eupatorium में हड्डियों का दर्द बहुत भयंकर होता है और पसीना बहुत कम या बिल्कुल नहीं आता। जबकि Bryonia में पसीना खूब आता है और रोगी बिल्कुल भी हिलना-डुलना पसंद नहीं करता।
प्रश्न 3: गठिया (Gout) के रोगियों के सिर दर्द में यह कैसे काम करती है?
उत्तर: जिन लोगों की प्रकृति गठिया की होती है, उन्हें अक्सर सिर में पीछे की तरफ दर्द होता है। इस दवा का विशेष लक्षण है कि जब जोड़ों में दर्द होता है तो सिर दर्द नहीं रहता, और जब सिर दर्द होता है तो जोड़ों का दर्द गायब हो जाता है (Alternating symptoms)।
प्रश्न 4: टाइफाइड (Typhoid) बुखार की मुख्य होम्योपैथिक दवाएं कौन सी हैं?
उत्तर: टाइफाइड में लक्षणों के अनुसार Baptisia (शुरुआती अवस्था), Bryonia (तेज प्यास और कब्ज), Rhus Tox (बेचैनी और दस्त), तथा Pyrogenium (जब अन्य दवाएं काम न करें) का सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है।
यह सामग्री सिर्फ शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और से पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।