Homeopathic Remedies for Fevers
साधारण ज्वर (Simple fever), सविराम-ज्वर (Malaria) और अविराम-ज्वर (Typhoid) के लिए मुख्य होम्योपैथिक औषधियों की विस्तृत जानकारी। जानें बुखार के लक्षण और उनके अचूक होम्योपैथिक इलाज।
भिन्न-भिन्न ज्वरों की मुख्य-मुख्य औषधियां (Principal Remedies for Different Fevers)
- ज्वर या बुखार (Fever) को मुख्य तौर पर तीन भागों (Categories) में बांटा जा सकता है:
1. साधारण ज्वर (Simple fever):
- जो सर्दी (Cold) लग जाने से, धूप (Sunlight) में घूमने से, पानी में भीग (Getting wet) जाने से, ज्यादा खा लेने (Overeating) से, कब्ज (Constipation) से, अधिक शारीरिक परिश्रम (Exertion) करने से, या भय (Fright) आदि के कारण हो जाता है।
2. सविराम-ज्वर (रुक-रुक कर आने वाला बुखार / Intermittent or Malarious fever):
- जो छूट कर (उतर कर) फिर वापस आ जाता है (जैसे मलेरिया / Malaria)।
3. अविराम-ज्वर (लगातार रहने वाला बुखार / Remittent, Continued or Typhoid type fever):
- जो टाइफॉयड (Typhoid) की तरह चढ़ता-ढलता (Fluctuates) रहता है, लेकिन बिल्कुल नहीं उतरता।
विस्तृत विवरण (Detailed Discription)-
1. साधारण-ज्वर (Simple Fevers) की औषधियां
कैम्फर (Camphor):
- सर्दी की पहली अवस्था (Initial stage of cold) में जब ऐसा प्रतीत हो कि सर्दी लग गई है, बुखार या जुकाम (Coryza) होगा, नाक से पानी बहने (Runny nose) लगे और थोड़ी-सी हरारत (हल्का बुखार / Mild fever) हो। (इसे पानी में 1 बूंद डालकर दो-तीन बार लें)।
इपिकाक (Ipecac):
- डॉ. ज्हार (Dr. Jahr) का कथन है कि अगर किसी अन्य औषधि (Medicine) के स्पष्ट लक्षण (Clear symptoms) न हों, तो 'अनियमित-ज्वर' (Irregular fever cases) में इससे इलाज (Treatment) प्रारंभ करना चाहिये। बे इपिकाक 30 की प्रति तीन घंटे मात्रा देते रहें हैं। जिससे उन्हें बहुत सफलता मिली है।
एकोनाइट (Aconite):
- सर्दी से शरीर का ताप (Temperature) बढ़े, खुश्क गर्मी (सूखापन / Dry heat) के साथ अत्यधिक प्यास (Thirst) हो। किसी भय (Fright) या डर से बुखार हो जाने पर यह सर्वश्रेष्ठ (Best) औषधि है।
बेलाडोना (Belladonna):
- सर्दी लगने से एकाएक (अचानक / Suddenly) तेज बुखार हो जाना, आंखें लाल होना, जोर का सिर-दर्द (Severe headache), शरीर में बेहद तपन या जलन (Burning heat) होना, और बुखार के साथ प्यास न होना (Thirstless)।
ग्लोनॉयन (Glonoinum):
- गर्मी या लू (Sunstroke) लगने से बुखार हो जाना, साथ ही भयंकर सिर-दर्द (Throbbing headache) होना।
फेरम फॉस (Ferrum Phos):
- यदि बुखार के कोई विशेष-लक्षण (Specific symptoms) न मिलें, तो यह बायोकैमिक औषधि (Biochemic 6X) देने से बहुत लाभ होता है।
रस टॉक्स (Rhus Tox) / डल्कामारा (Dulcamara):
- पानी में भीग जाने (Getting wet) से बुखार हो, तो ये दवाएं लाभ (Relief) करती हैं। (रस टॉक्स में जाड़ा/सर्दी चढ़ने से पहले सूखी खांसी / Dry cough आती है)।
एंटीमोनियम क्रूड (Antimonium Crud) / पल्सेटिला (Pulsatilla):
- ज्यादा या भारी (गरिष्ठ / Heavy food) पदार्थ खा लेने पर उत्पन्न अपच (Indigestion) के कारण बुखार आए। पल्सेटिला में रोगी को प्यास नहीं होती (Thirstless)।
नक्स वोमिका (Nux Vomica):
- अगर कब्ज (Constipation) के कारण बुखार हो। ऐसे में रोगी शीत-प्रधान (ठंड महसूस करने वाला / Chilly) होता है।
- चायना कि तरह बूखार का अगला आक्रमण पहले आक्रमण से 3-3 घंटे पहले (Anticipatory) होता है।
लुएटिकम(Lueticum) / सिफिलिनम (Syphilinum):
- जब किसी बच्चे का बुखार न टूटे और पता चले कि उसकी माता को 3-4 गर्भपात (Miscarriages) हो चुके हैं, और बुखार शाम 4 से 8 बजे के बीच बढ़ता (Aggravation) हो, तब इस नोसोड (Nosode - रोग के अंश से बनी दवा) की उच्च शक्ति (High potency - 1M या 10M) देने से लाभ होता है।
2. सविराम-ज्वर — मलेरिया आदि (Intermittent Fevers)
- मलेरिया बूखार में शीत, ताप, पसीना, प्यास, समय- इन पाँच बातों का विशेष ध्यान दिया जाता है।
- नये मलेरिया (Acute Malaria) में चिनिनम सल्फ (Chininum Sulph), चायना (China), आर्सेनिक (Arsenic), इपिकाक (Ipecac), सिड्रॉन (Cedron) और नक्स वोमिका (Nux Vomica) प्रमुख हैं।
- पुराने मलेरिया (Chronic Malaria) में नैट्रम म्यूर (Natrum Mur), कार्बो वेज (Carbo Veg), और सल्फ़र (Sulphur) श्रेष्ठ औषधियां हैं।
चिनिनम सल्फ (Chininum Sulph) :
- 'चिनिनम सल्फ' कुनैन (Quinine) का ही होम्योपैथिक नाम है।
- डॉ. हनीमैन (Dr. Hahnemann) ने सिनकोना (चायना) की छाल (Bark) के क्वाथ से अपने ऊपर 'परीक्षा' (Proving) की थी, जिससे होम्योपैथी का आविष्कार हुआ। स्वस्थ शरीर पर इसके सेवन से मलेरिया जैसे लक्षण प्रकट होते हैं, इसीलिए यह मलेरिया को दूर करती है। ऐलोपैथी में कुनैन का भारी मात्रा में प्रयोग होता है, जबकि होम्योपैथी में इसे सूक्ष्म या शक्तिकृत मात्रा में देते हैं।
- इसमें जाड़ा (Chill), ताप (Heat), और पसीना (Sweat)— तीनों अवस्थाएं (Stages) स्पष्ट होती हैं। बुखार का अगला आक्रमण (Attack) अक्सर 2-3 घंटे पहले (Anticipatory) आता है।
चायना (China):
- इसमें भी ठण्ड, ताप, पसीना तीनों अवस्थाएं स्पष्ट होती हैं। ठण्ड लगने से पहले प्यास, जाड़ा और ताप चढ़ जाने पर प्यास न रहना, पसीने की हालत में तेज प्यास; कमजोर बना देने वाला पसीना।
- चायना का बुखार रात को नहीं आता।
- बुखार का अगला आक्रमण नक्स की तरह पहले आक्रमण से 2-3 घंटे पहले आता है।
- सातवें, चौदहवें दिन बुखार आ सकता है।
आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album):
- जाड़ा (Chill) या ऊष्णावस्था (गर्मी की अवस्था / Heat stage) पूरी तरह से विकसित (Developed) न होना; पसीना (Sweat) बिल्कुल न होना; प्यास थोड़ी-थोड़ी (घूंट-घूंट / Sips) लगना; और रात 12 बजे बुखार का बढ़ना (Midnight aggravation)।
इपिकाक (Ipecac):
- बूखार का जब विशेष लक्षण प्रकट न हों, तब इसे देना चाहिये।
- जर्मनी के प्रसिद्ध डाक्टर ज्हार मलेरिया ज्वर में सबसे पहले इसी को दिया करते थे।
- जाड़ा लगने से पहल या जाड़े और ताप की अवस्था में मिचली उसका मुख्य लक्षण हैं।
सिड्रन (Cedron)-
- अगर घड़ी की सूई के अनुसार ठीक समय पर बूखार चढ़े।
नैट्रम म्यूर (Natrum Mur):
- सुबह 10-11 बजे के आस-पास बुखार आये; होठों पर पानी के छाले (Fever blisters / Herpes) पड़ें। यह पुराने मलेरिया-ज्वर (Chronic malaria) की बहुत प्रसिद्ध दवा है। (यह ज्यादा कुनैन खाकर बुखार को दबा देने के दुष्प्रभावों / Side effects में भी लाभप्रद है)।
- 4-7 बजे बूखार बढ़े तो लाइको उत्तम है।
कार्बो वेज (Carbo Veg):
- यह भी पुराने मलेरिया को दूर करता है। शीतावस्था में रोगी का शरीर बर्फ जैसा ठंडा (Icy cold) हो जाता है।
सल्फ़र (Sulphur):
- यदि अन्य किसी दवा से लाभ न हो, तो यह नये तथा पुराने दोनों प्रकार के मलेरिया में लाभ करता है।
नक्स वोमिका (Nux Vomica):
- जाड़ा, ताप, पसीना— इन तीनों अवस्थाओं में रोगी हमेशा कपड़ा ओढ़े (Covered) पड़ा रहता है। शरीर का जरा सा भी हिस्सा उघड़ने (खुलने / Uncovering) से वह सर्दी से कांप उठता है। शरीर आग की तरह जल रहा होता है, परन्तु वह कपड़ा हटा नहीं सकता।
3. अविराम-ज्वर — टाइफॉयड आदि (Remittent / Typhoid Fevers)
पाइरोजेनियम (Pyrogenium):
- डॉ. यिंगलिंग (Dr. Yingling) के अनुसार, टाइफ़ॉयड में जब एंटीबायोटिक्स (Antibiotics - जैसे क्लोरोमाइसेटिन / Chloromycetin) से भी लाभ न हो, तब इस दवा से लाभ होता है।
बैप्टीशिया (Baptisia):
- रोग के प्रारंभ (शुरुआत / Beginning) से अन्त तक इसका निम्न-शक्ति (Low potency) में प्रयोग करने से रोगी पूर्ण रूप से ठीक हो जाता है।
ब्रायोनिया (Bryonia):
- जब टाइफॉयड में कब्ज प्रधान (Constipation prominent) हो, तेज प्यास हो, रोगी बहुत अधिक मात्रा में पानी पीता हो, और एकदम चुपचाप पड़े रहना चाहता हो (Desires to remain completely motionless)।
रस टॉक्स (Rhus Tox):
- अगर टाइफॉयड का प्रारंभ पतले दस्तों (Diarrhea) से हुआ हो, रोगी बेचैन (Restless) हो, और इधर-उधर करवटें बदलने (Motion) से उसे चैन पड़ता हो।
टाइफ़ॉयडीनम (Typhoidinum):
- रोग के प्रारंभ होने का सन्देह (शक / Doubt) होते ही इसकी 200 शक्ति (200 Potency) की एक-दो मात्रा (Doses) देने से अन्त तक रोग गंभीर अवस्था में नहीं बिगड़ने पाता (Prevents complications)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: होम्योपैथी में बुखार (Fever) को कितने भागों में बांटा गया है?
उत्तर: बुखार को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है: साधारण ज्वर (Simple Fever), सविराम-ज्वर (Intermittent/Malaria), और अविराम-ज्वर (Remittent/Typhoid)।
प्रश्न 2: सर्दी लगकर अचानक तेज बुखार आने पर कौन सी दवा उपयोगी है?
उत्तर: सर्दी लगकर अचानक तेज बुखार, आंखें लाल होने और तेज सिरदर्द होने पर बेलाडोना (Belladonna) सबसे उपयुक्त औषधि मानी जाती है।
प्रश्न 3: मलेरिया के बुखार में 'चिनिनम सल्फ' (Chininum Sulph) कैसे काम करती है?
उत्तर: चिनिनम सल्फ कुनैन (Quinine) का शक्तिकृत (Potentized) रूप है। यह उन मलेरिया रोगियों में बहुत असरदार है जिनमें जाड़ा, गर्मी और पसीना तीनों अवस्थाएं स्पष्ट होती हैं।
प्रश्न 4: टाइफॉयड के शुरुआती लक्षण दिखने पर किस दवा का प्रयोग करना चाहिए?
उत्तर: रोग का संदेह होते ही टाइफ़ॉयडीनम (Typhoidinum) की 200 शक्ति देने से रोग को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है, साथ ही बैप्टीशिया (Baptisia) का प्रयोग भी शुरुआती दौर में बहुत लाभदायक होता है।
(अस्वीकरण / Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी होम्योपैथिक दवा का सेवन करने से पहले योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।)