Colchicum (Meadow Saffron) – कोलचिकम
Colchicum (कोलचिकम) खाने की गंध से उबकाई (Nausea from smell of food), पेट की भयंकर गैस (Bloating), और एक जोड़ से दूसरे जोड़ में घूमने वाले गठिया (Gout/Rheumatism) की अचूक दवा है। जानें इसके लक्षण।
Colchicum Autumnale (कोलचिकम), होम्योपैथी में मुख्य रूप से पाचन-तन्त्र (Digestive system), वात-रोगों (Gout / Rheumatism) और पेट के अफारे (Bloating) पर गहरा प्रभाव डालने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधि है।
व्यापक-लक्षण तथा मुख्य-रोग (Generals and Particulars)
- भोजन से अरुचि: रसोई की गन्ध (Smell of food) से उबकाई आने लगती है।
- पेट का अफारा (Tympanites): पेट के अफारे में यह जानवरों को भी ठीक कर देती है।
- पेट में विचित्र अनुभव: पेट में जलन (Burning) के साथ बर्फ की-सी ठंडक (Icy coldness) मालूम होना।
- पेचिश (Dysentery): पेचिश में ऐसी ऐंठन मानो आंतों से झिल्ली खुरच कर (Scraping of intestines) निकल रही हो।
- गठिया (Rheumatism): गठिये का दर्द एक जोड़ से दूसरे जोड़ में फिरना (Wandering pains)।
- शोथ (Edema): भिन्न-भिन्न अंगों में शोथ (सूजन) तथा जल-संचय (Dropsy / Accumulation of fluid)।
- ठंड तथा हरकत (Motion) से रोग में वृद्धि।
प्रकृति (Modalities) - लक्षण कम या ज्यादा होना
लक्षणों में कमी (Better / Amelioration):
- गर्मी (Warmth) से रोग का कम हो जाना।
- दोहरा होने से (Doubling up) रोग का कम हो जाना।
लक्षणों में वृद्धि (Worse / Aggravation):
- रसोई की गन्ध (Smell of cooking food) से रोग-वृद्धि।
- ठंड से, नमी (Cold and dampness) से रोग में वृद्धि।
- हरकत से (Motion), स्पर्श से (Touch) रोग वृद्धि।
- मनोवेग (Emotions / Mental exertion) से रोग में वृद्धि।
- सायं से प्रातः (Evening to morning) रोग में वृद्धि।
1. रसोई की गन्ध से उबकाई आने लगती है (Nausea from Smell of Cooking Food)
- इस औषधि का सबसे मुख्य-लक्षण यह है कि रोगी भोजन की गंध को, खासकर मछली (Fish), अंडे (Eggs), घी मिले मांस (Fatty meat) आदि पकने की गंध को बिल्कुल ही बर्दाश्त नहीं कर सकता, गंध आने से ही उसे उबकाई आने लगती है, जी मिचलाने (Nausea) लगता है।
- अत्यधिक संवेदनशीलता: गंध के प्रति उसकी इतनी असहनशीलता (Intolerance) होती है कि जो गंध दूसरों को प्रतीत भी नहीं होती, वह उसे परेशान कर देती है। रसोई घर कितनी ही दूर क्यों न हो, उसे गंध आ ही जाती है। गंध से उसकी परेशानी को देखकर घर के लोग रसोई के दरवाजे बन्द किये रखते हैं।
- रसोई की गंध से उबकाई आना—इस औषधि का चरित्रगत लक्षण (Keynote symptom) है, यह इसका 'व्यापक-लक्षण' (General) है। कोई भी रोग क्यों न हो— गर्भावस्था (Pregnancy) हो, बुखार (Fever) हो, पेचिश (Dysentery) हो, गठिया (Gout) हो, दस्त (Diarrhea) आते हों—अगर रोगी को भोजन की महक से उबकाई आती हो, तो Colchicum लाभ करेगा।
रक्तस्राव (Hemorrhage) का केस:
- इस प्रकरण में डॉ. नैश (Dr. Nash) का अनुभव देना प्रकरण-संगत होगा। एक 75 वर्ष की स्त्री को यकायक पेट की शिकायत हो गई, बड़ी मात्रा में पेट से खून की उल्टियां आने लगीं, उसके बाद खून के दस्त आने लगे। खून के निकालने की सब दवाइयां उन्होंने दे डालीं—Aconite, Mercurius, Nux Vomica, Ipecac, Hamamelis, Sulphur—परन्तु किसी से कुछ लाभ न हुआ। वह स्त्री पकते भोजन की गन्ध को बर्दाश्त नहीं कर सकती थी। रसोई-घर उसके स्थान से तीन कमरे दूर पर रक्खी गई थी क्योंकि उसकी गन्ध से उसे उबकाई आती थी। अन्त में, 'इस लक्षण पर' डॉ. नैश ने उसे Colchicum 200 की मात्रा हर दस्त आने के बाद देना शुरू किया और वह स्त्री भली-चंगी हो गई।
ज्वर (Fever) का केस:
- इसी प्रकार ज्वर पर डॉ. हाउले के अनुभव का डॉ. एलन ने वर्णन किया है—जो इस औषधि के इस पहलू पर प्रकाश डालता है। एक रोगी को प्रतिदिन 10 बजे प्रातः बुखार चढ़ता था, सख्त प्यास लगती थी, सर्दी लगकर सिर-दर्द हो जाता था। 10 बजे ज्वर आने के लक्षण पर उसे Natrum Mur 200 दिया गया, परन्तु कुछ लाभ नहीं हुआ। (Natrum Mur का 10 बजे ज्वर चढ़ना विशिष्ट-लक्षण है, और इस लक्षण पर प्रायः चिकित्सक लोग इस औषधि को दिया करते हैं)। अन्त में डॉ. हाउले ने यह देखकर कि 'रोगी भोजन की गन्ध नहीं बर्दाश्त कर सकता, भोजन के नाम से ही उसे उबकाई आने लगती है', Colchicum 200 (2M/CM) दवा की एक मात्रा दी। इसके देने के बाद न बुखार रहा, न सर्दी के आक्रमण हुए।
निष्कर्ष: इन दृष्टांतों को देने का अभिप्राय यही है कि चिकित्सक को 'रोग के नाम' के आधार पर औषधि न देकर 'लक्षणों के आधार पर' (Symptomatic treatment) चिकित्सा करनी चाहिये। उक्त (भोजन की गंध से उल्टी) लक्षणों के आधार पर दवा देने से गठिया, ज्वर, रुधिर आना, पेचिश—कोई भी रोग क्यों न हो, शांत हो जाता है। होम्योपैथी में विलक्षण, अद्भुत-लक्षण (Peculiar symptoms) के आधार पर दवा देने से ज्यादा सफलता मिलती है।
2. पेट के अफारे में यह जानवरों को भी ठीक कर देती है (Cures Severe Bloating / Tympanites even in Animals)
- पेट के अफारे (Tympanites / Bloating) में यह महौषध है।
- पेट में अफारा (bloating) आमतौर पर पाचन क्रिया में गड़बड़ी, गैस, कब्ज या जल्दी-जल्दी खाना खाने के कारण होता है, जिसमें पेट भरा हुआ और फूला हुआ महसूस होता है।
- डॉ. कैन्ट लिखते हैं कि आदमियों के ही क्या, जानवरों को जब पेट का अफारा हो जाता है और मालूम पड़ता है कि अब इसका पेट फट जाएगा, ढोल की तरह फूल जाता है, तब Colchicum से गाय, घोड़े तक का अफारा दूर हो जाता है, आदमी का तो कहना ही क्या है?
डॉ. फिशर लिखते हैं कि 1870 में उन्होंने डॉ. हेरिंग (Dr. Hering) का एक व्याख्यान सुना जिसमें उन्होंने कहा कि अगर जानवर का किसी प्रकार के (गीले/खराब) घास के खाने से पेट फूल जाए, तो Colchicum देने से तुरंत लाभ होगा। यह सुनकर डॉ. फिशर ने अपने एक किसान भाई को Colchicum 3x की दो ड्राम (Dram) की एक शीशी भेज दी और लिखा कि जानवर के पेट फूलने की हालत में यह दवा दे देना। इस दवा के मिलने के बाद इस किसान भाई के 'अपने' जानवर ही ठीक नहीं होने लगे, आस-पास के किसान भी इस दवा को मांगने लगे, और उससे उनके जानवर भी ठीक होने लगे।
3. पेट में जलन के साथ बर्फ की-सी ठंडक महसूस होना (Burning and Icy Coldness in Stomach)
- इस औषधि में दो लक्षण एक-दूसरे से विरुद्ध पाये जाते हैं। एक तरफ तो पेट में तेज़ जलन (Burning) होती है, और दूसरी तरफ पेट में बर्फ के समान ठंडक (Icy coldness) की अनुभूति होती है।
- 'अजीर्ण-रोग' (Dyspepsia / Indigestion) में जब रोगी को पेट में जलन होती हो, या ठंडक महसूस होती हो, या दोनों—जलन और ठंडक एक साथ—दोनों महसूस होते हैं, तब Carbo Veg, China और Lycopodium की अपेक्षा इस औषधि से शीघ्र लाभ होता है।
- अगर इन लक्षणों के साथ पेट में अफारा (गैस) पड़ गया हो, पेट ढोल की तरह तम्बूरा बन गया हो, तब यही औषधि उपयुक्त रहती है।
4. पेचिश (डिसेन्ट्री) में ऐसी ऐंठन मानो आंतों से झिल्ली खुरच कर निकल रही हो (Dysentery with Scraping Sensation)
- पेचिश (Dysentery) में मल सफेद (White mucus) होता है या उसमें खून (Blood) मिला हुआ होता है।
- खुरचने का अनुभव: देखने से ऐसा लगता है मानो आंतों में से खंड-खंड झिल्ली (Mucous membrane) खुरच कर (Scraped off) निकाली गई है। इस मल में मरोड़ (Tenemus), ऐंठन (Spasms) होती है। खुरचने के-से अनुभव में दर्द तो होता ही है।
Cantharis और Colocynthis से तुलना:
- ये सब लक्षण Cantharis तथा Colocynthis में भी पाये जाते हैं, परन्तु इनमें भेद यह है कि Cantharis में 'पेशाब की जलन' (Burning urination) का लक्षण भी मिला रहता है, और Colocynthis में रोगी पेट के दर्द के मारे 'दोहरा' (Doubling up) हुआ जाता है।
- अगर पेचिश में 'पेट फूलने' (Bloating) का लक्षण भी साथ मिला हो, तो Mercurius की अपेक्षा Colchicum अधिक उपयुक्त रहती है।
5. गठिये का एक जोड़ से दूसरे जोड़ में फिरना (Wandering Pains of Rheumatism and Gout)
- ऐलोपैथी में गठिये के लिये यह औषधि महामंत्र (रामबाण) है। होम्योपैथी में 'गठिया-धातु' (Gouty / Rheumatic diathesis) के व्यक्ति के लिये इस औषधि का प्रयोग होता है, परन्तु शक्तिकृत (Potentized) औषधि का ही प्रयोग होता है।
- लक्षण: गठिये में इसके लक्षण हैं: गठिये का दर्द एक जोड़ से दूसरे जोड़ को चला जाता है (Wandering pains), एक तरफ से दूसरी तरफ चला जाता है, नीचे से ऊपर या ऊपर से नीचे चला जाता है। इस गठिये के साथ सूजन (Swelling) भी हो सकती है, बिना सूजन भी रोग हो सकता है, कभी यहां कभी वहां। Ledum (लीडम) भी गठिये की दवा है, परन्तु Colchicum और Ledum में स्पष्ट भेद है।
Colchicum तथा Ledum की गठिये में तुलना:
- Colchicum में गठिये के रोगों को 'गर्मी' (Warmth) से आराम मिलता है।
- Ledum में यद्यपि रोगी अपनी 'प्रकृति' से शीत-प्रधान (Chilly) होता है, तो भी उसके 'गठिये के रोग' को 'ठंड' (Cold applications) से आराम मिलता है।
- डॉ. कैन्ट ने Ledum के प्रकरण में एक रोगी का उल्लेख किया है जिसके पैर गठिये से सूजे पड़े थे, परन्तु टब में बर्फ के टुकड़े डालकर वह अपने पैर उसमें लटकाये बैठा रहता था। उसकी स्त्री ने बतलाया कि उसे इसी प्रकार आराम आता है। उसे Ledum दिया गया और न तो उसे बर्फ के-से ठंडे पानी में पैर रखने की आवश्यकता रही, न उसके पैरों में गठिये की सूजन रही।
6. भिन्न-भिन्न अंगों में शोथ तथा जल-संचय (Edema and Dropsy)
- शरीर के भिन्न-भिन्न स्थानों में जल-संचय (Dropsy) इस औषधि की खासियत है।
- अगर हाथ-पैर में शोथ (सूजन / Edema) होती है, तो अंगुली से दबाने पर गढ़े पड़ जाते हैं (Pitting edema)।
- पेट में जल-संचय हो जाता है (Ascites / जलोदर); जहां-जहां आन्तरिक-आवरणों (Internal membranes) में जल-संचय हो सकता है, वहां-वहां जल-संचय के कारण शोथ हो जाता है।
- जो शोथ 'गठिया-धातु' के हों—यानी गठिया भी हो और शोथ भी हो—वहां Apis और Arsenic Album से लाभ न होने पर इससे (Colchicum से) लाभ होता है।
7. ठंड तथा हरकत से रोग में वृद्धि (Aggravation from Cold and Motion)
- इसका रोगी शीत-प्रधान (Chilly) होता है, ठंडी नम हवा (Cold damp wind) से रोग बढ़ जाता है, वर्षा (Rain) से बढ़ जाता है।
- बहुत अधिक गर्मी से भी रोग बढ़ता है। इस औषधि में 'गर्मी का गठिया' (Summer rheumatism) भी होता है।
- मूत्र के स्थूल-अंश (Uric acid) के न निकलने से, मूत्र के स्थूल-अंश के जोड़ों में बैठ जाने से गठिया होता है। गर्मी में मूत्र के ये स्थूल-कण (पसीने आदि के कारण) निकलने बन्द हो जाते हैं और गठिये के लक्षण प्रकट होने लगते हैं।
- हरकत (Motion) से रोग में वृद्धि होती है। Colchicum इस अवस्था को ठीक कर देता है।
8. इस औषधि के अन्य लक्षण (Other Symptoms)
i. दुःख और शोक (Ailments from grief): दुःख, शोक और दूसरों के कुकर्मों (Misdeeds of others) को देखकर रोगी को जो दुःख होता है, उससे उत्पन्न रोगों में यह हितकारी है।
ii. गठिया-धातु (Gouty diathesis): इसका रोगी 'गठिया-धातु' का होता है; प्रायः शरीर हष्ट-पुष्ट (Robust / Stout) होता है; इसके लक्षण प्रायः वृद्ध-पुरुषों (Old people) में पाये जाते हैं।
9. शक्ति तथा प्रकृति (Potency and Nature)
- शक्ति (Potency): 3, 6, 30, 200।
- प्रकृति (Nature): औषधि 'सर्द' (Chilly) प्रकृति के लिये है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: Colchicum (कोलचिकम) का सबसे प्रमुख और विचित्र लक्षण क्या है?
उत्तर: इसका सबसे प्रमुख (Keynote) लक्षण पकते हुए भोजन की गंध (विशेषकर मछली, अंडे या मांस) से भयानक उबकाई (Nausea) और जी मिचलाना है। यदि यह लक्षण किसी भी बीमारी (जैसे गठिया, पेचिश, बुखार या गर्भावस्था) में मौजूद हो, तो यह दवा अचूक काम करती है।
प्रश्न 2: क्या यह जानवरों के पेट फूलने (Bloating) में भी काम आती है?
उत्तर: जी हाँ, यदि गाय, भैंस या घोड़े को खराब घास खाने से भयंकर अफारा (Tympanites) हो जाए और पेट ढोल की तरह फूल जाए, तो Colchicum देने से तुरंत आराम मिलता है। यह इंसानों और जानवरों दोनों की गैस और अफारे की महौषधि है।
प्रश्न 3: गठिया (Gout/Rheumatism) में Colchicum और Ledum में क्या मुख्य अंतर है?
उत्तर: Colchicum के गठिया के दर्द को सिकाई या गर्मी (Warmth) से आराम मिलता है और इसका दर्द एक जोड़ से दूसरे जोड़ में घूमता (Wandering pain) रहता है। इसके विपरीत, Ledum के गठिया के दर्द में ठंडे पानी या बर्फ (Cold application) लगाने से आराम मिलता है।
प्रश्न 4: पेचिश (Dysentery) में इसका उपयोग कब करना चाहिए?
उत्तर: जब पेचिश में सफेद आंव या खून आए और मल त्यागते समय ऐसी मरोड़ और ऐंठन (Spasms) हो मानो आंतों से कोई झिल्ली खुरच कर (Scraping sensation) निकाली जा रही हो, तब यह दवा बहुत असरदार होती है।
प्रश्न 5: पेट के लक्षणों में इसकी क्या विशेषता है?
उत्तर: इसके रोगी को पेट में एक ही समय पर भयानक जलन (Burning) और बर्फ के समान ठंडक (Icy coldness) दोनों का विचित्र अनुभव हो सकता है। ऐसे अजीर्ण (Indigestion) और गैस की समस्या में यह दवा तुरंत राहत देती है।
यह सामग्री सिर्फ शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और से पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।